राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन पर संकट! 5 राज्यों ने केंद्र से मांगा फंड, महिलाओं के रोजगार पर असर की आशंका
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना को लेकर पांच राज्यों ने चिंता जताई है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर बकाया फंड जारी करने और नई योजना की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। राज्यों का कहना है कि समय पर पैसा नहीं मिलने से शहरी गरीबों, खासकर महिलाओं के रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। इससे स्वयं सहायता समूहों को बैंक कर्ज और ब्याज सब्सिडी मिलने में भी परेशानी हो सकती है।
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से 10 लाख से अधिक महिला समूह जुड़े
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की शुरुआत 2014 में हुई थी और यह अक्टूबर 2024 तक चला। इस दौरान 10 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह बनाए गए। योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर देकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था। इसके बाद केंद्र ने दीनदयाल जन आजीविका योजना-शहरी (DJAY-S) के नाम से पायलट परियोजना शुरू की, जो दिसंबर 2025 तक चली। हालांकि, नई योजना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से राज्यों में वित्तीय और प्रशासनिक परेशानियां बढ़ रही हैं।
तमिलनाडु ने 350 करोड़, मध्य प्रदेश ने मांगे 101 करोड़ रुपये
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वर्ष 2026-27 के लिए 350 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की। राज्य में मिशन के तहत 1.72 लाख स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे 18.70 लाख सदस्य जुड़े हैं। वहीं, मध्य प्रदेश ने 101 करोड़ रुपये मांगे हैं, जिसमें 13.71 करोड़ रुपये ब्याज सब्सिडी के लिए शामिल हैं। राज्य का कहना है कि योजना के तहत पहले से स्वीकृत बैंक ऋण पर ब्याज सब्सिडी की देनदारी खत्म नहीं होती। फंड नहीं मिलने से लाभार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
महाराष्ट्र, त्रिपुरा और कर्नाटक में भी फंड की कमी
महाराष्ट्र ने केंद्र से 80.99 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। राज्य के मुताबिक, कर्मचारियों के वेतन, ब्याज सब्सिडी और स्वयं सहायता समूहों के रिवॉल्विंग फंड से जुड़ी देनदारियां बढ़ रही हैं। त्रिपुरा ने 6.5 करोड़ रुपये मांगे हैं। मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार, पिछले दो वर्षों में नया फंड नहीं मिलने से समूहों और लाभार्थियों का काम प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, कर्नाटक ने बताया कि जुलाई 2025 से कर्मचारियों के वेतन के लिए धन उपलब्ध नहीं है और मंत्रालय से पायलट परियोजना की राशि के इस्तेमाल पर स्पष्टीकरण मांगा है।
केंद्र सरकार का क्या है रुख? दूसरी योजनाओं में भी हो रहा समूहों का इस्तेमाल
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के एक सूत्र के मुताबिक, मिशन के दिशानिर्देशों के तहत सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी राज्यों की थी। सूत्र ने बताया कि इन कर्मचारियों और स्वयं सहायता समूहों की सेवाएं पीएम स्वनिधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी दूसरी योजनाओं में भी ली जा रही हैं। अब राज्यों की मांग है कि बकाया राशि जारी करने के साथ नई योजना के भविष्य पर स्पष्ट फैसला लिया जाए, ताकि शहरी गरीबों और महिला स्वयं सहायता समूहों की आजीविका प्रभावित न हो।
