September 5, 2026

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केरल की बुजुर्ग महिला किसान ने बंजर ज़मीन पर उगाई चावल की फसल, बनी मिसाल

जहां आजकल युवा खेती से दूर होते जा रहे हैं, वहीं केरल की एक बुजुर्ग महिला किसान ने अपने हौसले और मेहनत से ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इस महिला ने वह कर दिखाया जिसे आमतौर पर नामुमकिन माना जाता है—एक बंजर और सूखी ज़मीन को उपजाऊ बना कर उसमें चावल की खेती की है।

कौन हैं ये महिला किसान?

इस प्रेरणादायक महिला का नाम कृष्णम्मा अम्मा है, जो केरल के पलक्कड़ ज़िले की रहने वाली हैं। उम्र 70 साल के पार होने के बावजूद उनका हौसला और मेहनत आज के युवाओं को भी प्रेरित कर रही है। कृष्णम्मा अम्मा ने कुछ वर्षों पहले एक बंजर पड़ी ज़मीन को देखा जिसे कोई छूने को भी तैयार नहीं था। लेकिन उन्होंने ठान लिया कि इस ज़मीन पर वे खेती करके दिखाएंगी।

कैसे हुई शुरुआत?

इस ज़मीन पर न तो पानी था, न उपजाऊ मिट्टी। लेकिन कृष्णम्मा अम्मा ने हार नहीं मानी। उन्होंने धीरे-धीरे उस ज़मीन की सफाई की, खुद ही फावड़ा और हल चलाकर मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने लगीं। बारिश के पानी को इकट्ठा करने के लिए छोटे-छोटे गड्ढे बनाए और देसी खाद का इस्तेमाल करके मिट्टी को खेती योग्य बनाया।

करीब एक साल की मेहनत के बाद उन्होंने चावल की बुआई की। पहले तो लोग हँसते थे, लेकिन जब फसल लहलहाने लगी तो वही लोग तारीफ करने लगे।

फसल देख लोग हुए हैरान

कृष्णम्मा अम्मा की ज़मीन पर जब पहली बार धान की बालियाँ निकलीं, तो पूरे गाँव में चर्चा फैल गई। एक महिला, वो भी बुजुर्ग, जिसने बिना किसी आधुनिक मशीन के, सिर्फ परंपरागत तरीकों और अपने जज़्बे के दम पर बंजर ज़मीन को हरा-भरा बना दिया।

आज वह हर साल अच्छी पैदावार लेती हैं और आसपास के किसानों को भी जैविक खेती और बंजर ज़मीन के उपयोग के लिए प्रेरित करती हैं।

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सोशल मीडिया पर तारीफों के पुल

जैसे ही कृष्णम्मा अम्मा की यह कहानी सामने आई, सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उनके वीडियो वायरल हो रहे हैं। कई यूज़र्स ने लिखा कि ऐसे लोग असली “भारत के हीरो” हैं जो बिना दिखावे के, धरती से जुड़े काम कर रहे हैं।

एक यूज़र ने लिखा:

“इस उम्र में इतना जज़्बा! कृष्णम्मा अम्मा को सलाम। अगर हम अपने खेतों को ऐसे ही संवारें, तो देश फिर से कृषि प्रधान बन सकता है।”

सरकारी अधिकारी भी हुए प्रभावित

स्थानीय कृषि विभाग ने भी कृष्णम्मा अम्मा के काम की सराहना की है। कुछ अधिकारियों ने उनकी खेती का निरीक्षण किया और उन्हें मदद देने की बात कही। जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि ऐसे किसानों को सरकार की योजनाओं से जोड़ने और जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

उत्तर भारत के किसानों के लिए प्रेरणा

उत्तर भारत में भी बड़ी मात्रा में बंजर और अनुपयोगी ज़मीनें पड़ी हैं। कृष्णम्मा अम्मा की कहानी दिखाती है कि अगर नीयत और मेहनत हो, तो किसी भी ज़मीन को उपजाऊ बनाया जा सकता है। यह कहानी खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे किसानों के लिए प्रेरणादायक है, जो अक्सर संसाधनों की कमी से खेती नहीं कर पाते।

केरल की कृष्णम्मा अम्मा ने यह साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और अगर दिल में लगन हो, तो कोई भी मुश्किल आसान हो सकती है। बंजर ज़मीन पर चावल की खेती करके उन्होंने न सिर्फ पर्यावरण की सेवा की है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया है कि खेती छोड़ना नहीं, अपनाना है।

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