आज हम आपको एक ऐसी शख्सियत से मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने मिस इंटरनेशनल इंडिया 2023 का खिताब जीतने के बाद ऐसा फैसला लिया जिसने सभी को हैरान कर दिया। हम बात कर रहे हैं पुणे की कशिश मेथवानी की। जी हाँ… सौंदर्य प्रतियोगिता की चमक-दमक छोड़कर भारतीय सेना का रास्ता चुनना आसान नहीं था। लेकिन कशिश ने यह साबित कर दिया कि असली सफलता वही है, जिसमें देश सेवा शामिल हो।

ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से वायु रक्षा रेजिमेंट तक
चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में लगभग एक साल की कड़ी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, 6 सितंबर 2024 को कशिश आधिकारिक तौर पर वायु रक्षा रेजिमेंट में शामिल हो गईं। यह पल सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था।
शिक्षा और उपलब्धियाँ
कशिश का अकादमिक रिकॉर्ड भी उतना ही शानदार है। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया, IISc से न्यूरोसाइंस में रिसर्च की और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी का ऑफर भी हासिल किया। लेकिन उन्होंने सारी सुविधाएँ छोड़कर भारतीय सेना का सपना पूरा करने का फैसला किया।
प्रेरणा और पारिवारिक पृष्ठभूमि
कशिश ने खुद कहा पेजेंट्री मेरा पैशन था, लेकिन सेना मेरा सपना। एनसीसी और गणतंत्र दिवस परेड ने मुझे एहसास दिलाया कि मेरी असली जगह आर्मी ही है। उनके पिता वैज्ञानिक रहे हैं, माँ आर्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका हैं और बहन इंजीनियर। परिवार से मिली प्रेरणा ने उन्हें कठिन फैसले लेने और आगे बढ़ने की ताकत दी।

बहुमुखी प्रतिभा और समाजसेवा
कशिश केवल पढ़ाई या ब्यूटी पेजेंट तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने भरतनाट्यम, तबला, डिबेट्स, शूटिंग और बास्केटबॉल में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। इतना ही नहीं, 19 साल की उम्र में उन्होंने एक एनजीओ की भी शुरुआत की, जो समाजसेवा और जरूरतमंदों की मदद के लिए काम करता है।
युवाओं के लिए रोल मॉडल
आज कशिश मेथवानी लाखों युवाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि असली खूबसूरती केवल चेहरे की नहीं, बल्कि देश की सेवा में है। उनका सफर बताता है कि अगर हिम्मत और जुनून हो, तो कोई भी सपना सच किया जा सकता है।

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