September 9, 2026

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Telegram बैन पर दिल्ली हाईकोर्ट में तीखी बहस, आदेश की वैधता पर उठे सवाल

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति तेजस कारिया की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने सरकार के आदेश में कई कानूनी खामियों का दावा किया। उन्होंने अदालत को बताया कि जारी किया गया अंतिम आदेश केवल पहले दिए गए अंतरिम निर्देश की पुष्टि करता है और उसमें सचिव की स्वतंत्र संतुष्टि तथा लिखित कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने सरकार का पक्ष रखा। अदालत ने याचिकाकर्ता से अंतिम आदेश की वैधता को लेकर विस्तृत दलीलें प्रस्तुत करने को कहा।

सुनवाई के दौरान ध्रुव मेहता ने यह भी तर्क दिया कि पूरे टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है और यदि कोई आपत्तिजनक सामग्री है तो केवल संबंधित जानकारी को ब्लॉक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह मामला आपातकालीन स्थिति की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल आनुपातिक और विवेकपूर्ण तरीके से होना चाहिए। उन्होंने 16 जून को जारी किए गए संचार का भी उल्लेख किया और कहा कि सचिव द्वारा उपलब्ध तथ्यों और सामग्री का स्वतंत्र मूल्यांकन आदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। अदालत ने भी इस बात पर जोर दिया कि किसी भी आपातकालीन आदेश के पीछे ठोस कारण और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 और धारा 69A के प्रावधानों पर भी चर्चा की। अदालत ने कहा कि एक मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के रूप में टेलीग्राम पर धारा 79 के तहत आवश्यक सावधानी बरतने की स्वतंत्र जिम्मेदारी है। साथ ही धारा 69A के तहत सरकार को मिली शक्तियों के प्रयोग की वैधता का परीक्षण भी जरूरी है। पीठ ने बताया कि किसी भी आपातकालीन ब्लॉकिंग आदेश के लिए नामित अधिकारी, सचिव और समीक्षा समिति सहित तीन स्तरों की प्रक्रिया निर्धारित है और याचिकाकर्ता को यह दिखाना होगा कि इन सभी चरणों का सही तरीके से पालन हुआ या नहीं। मामले की अगली सुनवाई में इन कानूनी पहलुओं पर और विस्तार से बहस होने की संभावना है, जिससे टेलीग्राम बैन विवाद में महत्वपूर्ण दिशा तय हो सकती है।

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