Sanjay Raut: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में जारी राजनीतिक संकट के बीच राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागी सांसदों पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक में छह लोकसभा सांसदों की अनुपस्थिति के बाद पार्टी में फूट की अटकलें और तेज हो गई हैं। बैठक में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और स्वयं संजय राउत मौजूद रहे, जबकि नागेश पाटिल अष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमराजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल नहीं हुए। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राउत ने इन सांसदों को “गद्दार, बेईमान और धोखेबाज” करार दिया और आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। पार्टी नेता अनिल देसाई ने भी स्पष्ट किया कि अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र और पार्टी की विचारधारा के खिलाफ बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों को अतिरिक्त 10 करोड़ रुपये दिए गए और उन्हें राजस्थान में सुरक्षित स्थान पर रखा गया। राउत ने कहा कि यदि इन सांसदों में नैतिकता बची है तो उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालतों ने पिछले चार वर्षों में शिवसेना से जुड़े मामलों पर समय रहते फैसला दिया होता तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। राउत ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किए जाने की जिम्मेदारी इन संस्थाओं पर भी आती है। उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनकी सदस्यता रद्द कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस राजनीतिक घमासान के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय की सतर्कता के बाद शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की सुरक्षा बढ़ाकर वाई-प्लस श्रेणी कर दी गई है। महाराष्ट्र गृह विभाग ने खुफिया रिपोर्टों के आधार पर यह फैसला लिया है। सुरक्षा बढ़ाए जाने वाले सांसदों में संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल हैं। इन सांसदों की हालिया गतिविधियों और पार्टी बैठकों से दूरी के कारण महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक किसी भी सांसद ने आधिकारिक रूप से पार्टी छोड़ने या किसी अन्य गुट में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। वहीं, संजय राउत लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि शिवसेना (यूबीटी) इस राजनीतिक चुनौती का जवाब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर देगी।