India-US Relations
India-US Relations: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को झकझोर कर रख दिया है। इस बीच अमेरिका ने भारत को पहले से समुद्र में मौजूद रूसी कच्चे तेल को खरीदने और भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाने की अस्थायी अनुमति दे दी है। इस फैसले को लेकर कई सवाल उठे, जिनका जवाब अब व्हाइट हाउस ने दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार भारत को यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि भारत अमेरिका का “अच्छा और भरोसेमंद साझेदार” रहा है और उसने पहले ही अमेरिकी शर्तों का पालन करते हुए रूसी तेल की खरीद बंद कर दी थी।
India-US Relations: जाने व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने क्या कुछ कहा
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा कि भारत को दी गई यह अनुमति पूरी तरह अस्थायी है और इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की कमी को पूरा करना है। उनके अनुसार जिस रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी गई है वह पहले से समुद्री मार्ग में था, इसलिए इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा। साथ ही पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े तनाव के कारण तेल बाजार में अस्थायी संकट पैदा हुआ है, जिसे संतुलित करने के लिए यह फैसला लिया गया।
भारत सरकार ने अपना रुख किया स्पष्ट
जानकारी के लिए बता दे कि India-US Relations के बीच, उधर भारत ने भी साफ कर दिया है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना उसकी पहली प्राथमिकता है। सरकार का कहना है कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है, जबकि देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में वैश्विक संकट के दौर में भारत अलग-अलग देशों से तेल आयात की रणनीति अपनाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका द्वारा दी गई यह छूट न सिर्फ वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने की कोशिश है, बल्कि यह भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की मजबूती को भी दर्शाती है।
