कंगना रनौत का हमला डेटिंग ऐप्स समाज का ‘गटर’ या नई पीढ़ी की ज़रूरत?

आज हम बात करेंगे एक ऐसे मुद्दे की जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है । एक ऐसा बयान जिसने हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। बॉलीवुड की ‘क्वीन’ कंगना रनौत ने हाल ही में एक इंटरव्यू में डेटिंग ऐप्स को लेकर बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहामैं कभी भी डेटिंग ऐप्स पर नहीं जाना चाहती थी… ये बेहद नीच काम है। हर महिला और पुरुष की ज़रूरतें होती हैं। लेकिन क्या हम उन्हें शालीनता से पूरा करें या रातों को भटकते रहें? कंगना के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तूफान आ गया। कुछ लोग उनकी बात से सहमत दिखे, तो कुछ ने उन्हें “बैकवर्ड माइंडसेट” कहकर ट्रोल किया।

उत्तर भारत के नज़रिए से सोचें

चाहे बात करें लखनऊ, पटना, कानपुर, दिल्ली या जयपुर की यहां रिश्तों को अब भी पारिवारिक सहमति, समाज की मर्यादा और सामाजिक ढांचे से जोड़कर देखा जाता है। यहां “बायो डेटा”कुंडली मिलान” और “परिवार की इजाज़त” अब भी रिश्तों की बुनियाद माने जाते हैं। ऐसे में अगर कोई ऐप कहे कि स्वाइप करो और पार्टनर चुनो तो यह बात कई लोगों को हज़म नहीं होती।

लेकिन क्या प्यार तलाशना गुनाह है?

आज का युवा अकेला है, मानसिक दबाव में है, और कई बार भावनात्मक जुड़ाव की तलाश में होता है।डेटिंग ऐप्स कुछ लोगों के लिए एक खतरनाक ज़रिया बन चुके हैं, तो कई लोगों के लिए यही ऐप्स प्यार, दोस्ती और रिश्तों की शुरुआत का माध्यम भी बने हैं।

तो कंगना सही हैं या गलत?

कहना मुश्किल है।कंगना का इशारा संस्कृति और मूल्यों के गिरते स्तर की ओर था, जो वाजिब चिंता है। लेकिन टेक्नोलॉजी को पूरी तरह ‘गटर’ बताना भी अतिशयोक्ति है।

अब आपकी बारी है

क्या आप कंगना की सोच से सहमत हैंक्या डेटिंग ऐप्स रिश्तों को हल्का बना रहे हैं या बस एक नया विकल्प हैं?

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