ECI-SIR Row: चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में मतभेद, जानें पूरा मामला
ECI-SIR Row
ECI-SIR Row के बीच चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और पिछले एक साल में आयोग के सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं।
ECI-SIR Row में नियुक्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
इसी ECI-SIR Row के बीच सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की दो सदस्यीय पीठ इस बात पर अलग-अलग राय पर पहुंची कि मामले को पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। जस्टिस दत्ता ने इसे बड़ी पीठ के पास भेजने की जरूरत से असहमति जताई, जबकि जस्टिस शर्मा ने बड़ी पीठ को मामला भेजने का समर्थन किया।
ECI-SIR Row: चयन समिति में सरकार की भूमिका पर सवाल
ECI-SIR Row में सबसे अहम मुद्दा 2023 के नियुक्ति कानून के तहत बनी चयन समिति है। इस कानून ने पहले की व्यवस्था में मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया। इसके साथ प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली तीन सदस्यीय समिति बनती है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इससे सरकार के दो प्रतिनिधि और विपक्ष के एक प्रतिनिधि वाली संरचना बनती है। जस्टिस दत्ता ने चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के साथ-साथ इस बात पर भी जोर दिया कि संस्था स्वतंत्र होने के साथ-साथ स्वतंत्र दिखाई भी देनी चाहिए।
ECI-SIR Row और 2023 का अनूप बरनवाल फैसला
ECI-SIR Row को समझने के लिए 2023 का अनूप बरनवाल मामला भी अहम है। दिए गए विवरण के मुताबिक, उस समय सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश वाली समिति से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की व्यवस्था तय की थी, जब तक संसद कानून नहीं बनाती। बाद में दिसंबर 2023 में कानून बनाया गया और चयन समिति की संरचना में बदलाव किया गया। इसी बदलाव को चुनौती देने वाली याचिकाएं अब सुप्रीम कोर्ट के सामने हैं।
ECI-SIR Row में टीएन शेषन का दौर भी चर्चा में
ECI-SIR Row के बीच चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर पुरानी बहस भी सामने आ रही है। दिए गए डेटा के मुताबिक, 1993 में टीएन शेषन के मुख्य चुनाव आयुक्त रहने के दौरान आयोग को बहु-सदस्यीय बनाया गया और दो चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए। इसके बाद मतभेद की स्थिति में बहुमत से फैसला लेने की व्यवस्था रही। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल यह है कि 2023 के कानून के तहत बनी नियुक्ति प्रक्रिया संवैधानिक स्वतंत्रता की कसौटी पर कैसी बैठती है। मामले में दोनों जजों की अलग राय के बाद आगे की सुनवाई बड़ी पीठ के गठन पर निर्भर करेगी।
