भारतीय निशानेबाजी की नई सनसनी: सुरुचि सिंह ने हासिल की विश्व नंबर 1 रैंकिंग

भारतीय निशानेबाजी के लिए यह गर्व का क्षण है। युवा निशानेबाज सुरुचि सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन से महिला 10 मीटर एयर पिस्टल में विश्व नंबर 1 रैंकिंग हासिल कर इतिहास रच दिया है। मात्र 19 वर्ष की आयु में, सुरुचि ने न केवल ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भारत की स्टार निशानेबाज मनु भाकर को पीछे छोड़ा, बल्कि कई दिग्गज चीनी निशानेबाजों को भी पछाड़कर 4162 अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय खेल जगत के लिए एक नया अध्याय है और युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

विश्व कप में शानदार शुरुआत

सुरुचि सिंह ने इसी साल सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखा और अपने पहले ही सीजन में लगातार तीन व्यक्तिगत विश्व कप खिताब जीतकर तहलका मचा दिया। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके कौशल को दर्शाती है, बल्कि उनकी मेहनत और समर्पण को भी उजागर करती है। विश्व कप में उनकी लगातार जीत ने उन्हें वैश्विक मंच पर एक उभरती हुई सितारा बनाया है। सुरुचि की यह सफलता उनकी पहली विश्व चैंपियनशिप की तैयारी के लिए आत्मविश्वास का एक बड़ा स्रोत होगी, जहां वह भारत का नाम और ऊंचा करने की उम्मीद रखती हैं।

भारतीय निशानेबाजों का दबदबा

सुरुचि के अलावा, भारत की अन्य निशानेबाज भी विश्व मंच पर अपनी छाप छोड़ रही हैं। पेरिस ओलंपिक की पदक विजेता मनु भाकर वर्तमान में 1988 रेटिंग अंकों के साथ महिला 10 मीटर एयर पिस्टल विश्व रैंकिंग में छठे स्थान पर हैं। दूसरी ओर, मौजूदा एशियाई चैंपियन सिफत कौर समरा महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन श्रेणी में 3034 अंकों के साथ विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर हैं। वह नॉर्वे की म्यूनिख विश्व कप चैंपियन जीनेट हेग डुएस्टैड से थोड़ा पीछे हैं, लेकिन उनकी यह उपलब्धि भारतीय निशानेबाजी के उज्ज्वल भविष्य को दर्शाती है।

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विश्व रैंकिंग में शीर्ष-10

महिला 10 मीटर एयर पिस्टल की नवीनतम विश्व रैंकिंग में सुरुचि सिंह 4162 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं। उनके बाद चीन की याओ कियानक्सुन (3195 अंक), कियान वेई (2178 अंक), और जियांग रानक्सिन (2158 अंक) क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। फ्रांस की जेड्रेजेव्स्की केमिल 2020 अंकों के साथ पांचवें और भारत की मनु भाकर 1988 अंकों के साथ छठे स्थान पर हैं। इस सूची में तुर्की, हांगकांग, उरुग्वे और पुर्तगाल की निशानेबाज भी शामिल हैं, जो वैश्विक मंच पर भारतीय निशानेबाजों के दबदबे को और उजागर करता है।

भविष्य की उम्मीदें

सुरुचि सिंह की यह उपलब्धि भारतीय निशानेबाजी के लिए एक नया मील का पत्थर है। उनकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास ने न केवल उन्हें विश्व नंबर 1 बनाया, बल्कि युवा निशानेबाजों के लिए एक प्रेरणा स्थापित की है। विश्व चैंपियनशिप और भविष्य के अन्य बड़े आयोजनों में सुरुचि और अन्य भारतीय निशानेबाजों से देश को और भी गर्व के पल मिलने की उम्मीद है।

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