September 3, 2026

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Noida: जिला अस्पताल में बड़ा घोटाला? जानवरों की सिरिंज खरीद पर उठे सवाल

Noida: नोएडा के सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में जानवरों के लिए इस्तेमाल होने वाली सिरिंजों की खरीद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। दस्तावेजों और खरीद अनुबंध से यह खुलासा हुआ है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से 2 दिसंबर को सिरिंजों का ऑर्डर जारी किया गया था और महज 15 दिनों के भीतर 17 दिसंबर तक पूरी खेप अस्पताल में पहुंचा दी गई थी। मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि खरीद प्रक्रिया के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की ओर से दी गई थी। अस्पताल प्रशासन लगातार यह दावा करता रहा है कि ऑर्डर को डिलीवरी से पहले ही रद्द कर दिया गया था और किसी प्रकार का भुगतान नहीं हुआ था, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज इस दावे को चुनौती देते हैं। अनुबंध में खरीदार के रूप में संबंधित डॉक्टर का उल्लेख है, जबकि भुगतान प्रक्रिया में अकाउंटेंट की भूमिका दर्ज है। इससे संकेत मिलता है कि खरीद अस्पताल प्रशासन की जानकारी और सहमति से ही की गई थी।

दस्तावेजों के अनुसार जिला अस्पताल ने जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से कुल 1 लाख 20 हजार जानवरों की सिरिंजें खरीदी थीं। इनमें 5 एमएल की 60 हजार और 30 एमएल की 60 हजार सिरिंज शामिल थीं। 5 एमएल वाली सिरिंजों की कीमत 2 लाख 97 हजार रुपये जबकि 30 एमएल वाली सिरिंजों की कीमत 3 लाख 60 हजार रुपये बताई गई है। इस प्रकार कुल 6 लाख 57 हजार रुपये का भुगतान इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से किया गया। भुगतान संबंधी रिकॉर्ड में अकाउंटेंट का नाम दर्ज है, जबकि वित्तीय स्वीकृति सीएमएस स्तर से दी गई बताई गई है। खरीद प्रक्रिया और भुगतान संबंधी इन तथ्यों के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन के आधिकारिक दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर यह भी चर्चा है कि यदि ऑर्डर वास्तव में रद्द कर दिया गया था, तो फिर भुगतान और डिलीवरी से जुड़े दस्तावेज कैसे तैयार हुए।

बताया जा रहा है कि दिसंबर 2025 में हुई यह खरीद अप्रैल 2026 में तब चर्चा में आई जब वित्तीय वर्ष समाप्ति के दौरान रिकॉर्ड की जांच की जा रही थी। जांच में सामने आए दस्तावेजों में प्रशासनिक अनुमोदक और वित्तीय अनुमोदक दोनों के पदनाम के रूप में सीएमएस का उल्लेख किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि खरीद प्रक्रिया को उच्च स्तर पर मंजूरी मिली थी। मामला अब शासन स्तर तक पहुंच चुका है और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन पर आरोप लग रहे हैं कि वह गोलमोल जवाब देकर अपनी लापरवाही और संभावित अनियमितताओं को छिपाने का प्रयास कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच में इस खरीद प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों का अंतिम निष्कर्ष क्या निकलता है और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।

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