रेजीनगर उपचुनाव 2026: मुस्लिम बहुल सीट पर BJP आगे, हुमायूं कबीर के बेटे दूसरे नंबर पर
रेजीनगर उपचुनाव 2026
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर उपचुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) शुरुआती रुझानों में बढ़त बनाए हुए है। मुस्लिम बहुल इस विधानसभा सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार शाखारव सरकार आगे चल रहे हैं, जबकि एजीयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद दूसरे स्थान पर हैं। रेजीनगर को हुमायूं कबीर का गढ़ माना जाता है। ऐसे में शुरुआती रुझानों ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
दो राउंड के बाद BJP को 20,415 वोट
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दो राउंड की मतगणना के बाद बीजेपी उम्मीदवार शाखारव सरकार को 20,415 वोट मिले हैं। वहीं, गुलाम नबी आजाद 3,865 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। कांग्रेस के उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को 1,291 वोट मिले हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी को 753 वोट मिले हैं। ये आंकड़े शुरुआती मतगणना के हैं और अंतिम परिणाम से अलग हो सकते हैं।
मुस्लिम बहुल रेजीनगर सीट पर सभी की नजरें
पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर करीब 65 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इस सीट को हुमायूं कबीर का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता रहा है। ऐसे में रेजीनगर उपचुनाव 2026 में बीजेपी की बढ़त को अहम माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम नतीजे के लिए मतगणना पूरी होने और आधिकारिक परिणाम घोषित होने का इंतजार करना होगा।
हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रेजीनगर में उपचुनाव
हुमायूं कबीर ने विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नौदा, दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। इस चुनाव में उनके बेटे गुलाम नबी आजाद मैदान में हैं। शुरुआती रुझानों में उनका दूसरे स्थान पर रहना इस मुकाबले को चर्चा में बनाए हुए है।
TMC के बागी गुट को झटका
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भी बीजेपी बढ़त बनाए हुए है। चार राउंड की मतगणना के बाद बीजेपी उम्मीदवार को 43,655 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 11,712 वोट मिले। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लेफ्ट तीसरे स्थान पर है और तृणमूल कांग्रेस का बागी गुट पांचवें स्थान पर चल रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई थी। विधानसभा चुनाव के बाद TMC में बगावत और अलग गुट बनने के बीच इन उपचुनावों के रुझानों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
