January 14, 2026

लोकसभा में तीन विवादास्पद विधेयकों पर हंगामा, जेपीसी गठन की तैयारी

विधेयकों का परिचय और विवाद

20 अगस्त 2025 को लोकसभा में सरकार ने तीन महत्वपूर्ण और विवादास्पद विधेयक पेश किए, जिनमें संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025, और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं। इनमें से संविधान संशोधन विधेयक विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिनों तक गिरफ्तारी या हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान प्रस्तावित है। इन विधेयकों को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव पर इन्हें 21 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का निर्णय लिया गया।

विपक्षी गठबंधन, इंडिया गठबंधन, ने जेपीसी की बैठकों का बहिष्कार करने का फैसला किया है, जिससे संसद में तनाव और बढ़ गया है। इस बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है और इन विधेयकों पर व्यापक चर्चा के लिए जेपीसी के गठन की प्रक्रिया को तेज करने की बात कही है।

ओम बिरला का बयान: संसदीय समितियों की भूमिका

भुवनेश्वर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसदीय समितियां दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन समितियों में सभी सदस्य अपनी बात खुलकर रख सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके। बिरला ने सभी राजनीतिक दलों से जेपीसी के लिए सदस्यों के नाम प्रस्तावित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, “हम जल्द ही व्यापक चर्चा के लिए जेपीसी का गठन करेंगे।”

बिरला ने संसद और विधानसभाओं में हो रही पूर्व नियोजित रुकावटों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी रुकावटें लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं। उनके अनुसार, संसद और विधानसभाएं चर्चा और असहमति के मंच हैं, जो लोकतंत्र की ताकत को दर्शाते हैं। बिरला ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक बहस की उम्मीद करती है, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।

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जेपीसी और सरकार की रणनीति

लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकार सभी दलों के साथ बातचीत कर रही है ताकि जेपीसी में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि यह समिति विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श करेगी और सभी पक्षों को अपनी राय रखने का अवसर देगी। बिरला ने जोर देकर कहा कि विधायी निकायों को राष्ट्रीय हित में व्यापक बहस सुनिश्चित करनी चाहिए।

विपक्ष के बहिष्कार के फैसले के बावजूद, सरकार जेपीसी के माध्यम से इन विधेयकों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। बिरला ने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसद में होने वाली बहसें रचनात्मक और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप हों।

लोकतंत्र में चर्चा की अहमियत

ओम बिरला ने अपने बयान में लोकतंत्र में असहमति और चर्चा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसद का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं को उठाना और उनके समाधान के लिए कानून बनाना है। पूर्व नियोजित रुकावटें इस प्रक्रिया को बाधित करती हैं, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। बिरला ने सभी दलों से अपील की कि वे राष्ट्रीय हित में सहयोग करें और संसद को एक रचनात्मक मंच के रूप में उपयोग करें।

इन तीनों विधेयकों पर संसद में होने वाली चर्चा और जेपीसी की भूमिका आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगी। सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाएगी या नहीं, यह देखना बाकी है।

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