Ayodhya Ram Mandir Donation Theft: 2 करोड़ बरामद, ट्रस्ट पर उठे बड़े सवाल
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बाद अब उनकी पत्नी पूनम यादव भी सामने आई हैं। उन्होंने अपने पति पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि परिवार को बदनाम किया जा रहा है और यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। दूसरी तरफ SIT की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और कई नए पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। मामले में अब तक कई राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है।
आखिर अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला कहां तक पहुंचा?
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब आरोपी कर्मचारी रामशंकर यादव की पत्नी पूनम यादव ने मीडिया के सामने आकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के पास 50 कमरे, होटल, हॉस्टल और लग्जरी गाड़ियों जैसी बातें पूरी तरह झूठी हैं। पूनम यादव ने दावा किया कि यदि किसी के पास कोई सबूत है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। इससे पहले रामशंकर यादव भी वीडियो जारी कर अपनी सफाई दे चुके हैं। इसी बीच राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े इस विवाद में सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा जारी है।
SIT जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया?
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) लगातार तीसरे दिन भी मंदिर परिसर पहुंची। जांच टीम ने मंदिर में चढ़ावा गिनने और बैंक में जमा कराने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटाई। सूत्रों के मुताबिक SIT ने ट्रस्ट पदाधिकारियों समेत 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चढ़ावे की गिनती कौन करता था, धनराशि बैंक तक कैसे पहुंचती थी और इस प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी। चर्चा है कि जांच एजेंसियां उन बैंक कर्मचारियों से भी पूछताछ कर सकती हैं, जो चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया में शामिल रहे हैं।
2 करोड़ की बरामदगी के बाद क्यों बढ़े सवाल?
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला में अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर यादव शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इन लोगों की निशानदेही पर करीब 2 करोड़ रुपए की रिकवरी की जा चुकी है। सभी आरोपी किसी न किसी रूप में दान राशि की गिनती और प्रबंधन प्रक्रिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक कई दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी वजह से जांच एजेंसियां सबूतों और दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
विपक्ष और राजनीतिक नेताओं ने क्या सवाल उठाए?
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला को लेकर विपक्ष लगातार सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठा रहा है। समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने दावा किया था कि मंदिर से करोड़ों रुपये की चोरी हुई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। वहीं भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की थी। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बयान सामने आने के बाद यह मुद्दा अब केवल मंदिर प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है।
बृजभूषण, रवि किशन और डिंपल यादव ने क्या कहा?
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला पर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जिस तरह के दस्तावेज सामने आ रहे हैं, उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि बिना आग के धुआं नहीं उठता और मामले की गंभीर जांच जरूरी है। भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा कि जो भी दोषी होगा उसे कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मामले की निष्पक्ष जांच करा रही हैं। वहीं सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों और कॉरिडोर परियोजनाओं से जुड़े कई मामलों में पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
ट्रस्ट को भंग करने की मांग क्यों उठ रही है?
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला में बुधवार को सपा नेता पवन पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना मुकदमा दर्ज किए SIT जांच कैसे कर रही है, यह भी एक बड़ा सवाल है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित पदाधिकारियों को जिम्मेदारियों से दूर रखा जाना चाहिए। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट तथा जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है। जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदार कौन है।