London का मशहूर Veeraswamy Restaurant कोर्ट पहुंचा, लीज विवाद बढ़ा
ब्रिटेन का सबसे पुराना भारतीय रेस्तरां Veeraswamy Restaurant इन दिनों अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। लंदन के प्रतिष्ठित इलाके में स्थित यह ऐतिहासिक रेस्तरां अपनी इमारत की लीज समाप्त होने के बाद कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। यदि अदालत में फैसला इसके खिलाफ जाता है तो लगभग एक सदी से चल रहा यह रेस्तरां अपनी मौजूदा जगह खो सकता है। यह मामला सिर्फ एक व्यवसाय का नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय खानपान की विरासत से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। इसी वजह से इस विवाद पर दुनियाभर के भारतीय समुदाय और फूड इंडस्ट्री की नजर बनी हुई है।
आखिर Veeraswamy Restaurant पर बंद होने का खतरा क्यों मंडरा रहा है?
Veeraswamy Restaurant जिस इमारत में संचालित होता है, उसका स्वामित्व क्राउन एस्टेट के पास है। क्राउन एस्टेट ब्रिटेन की एक बड़ी सार्वजनिक संपत्ति संस्था है जो राजा के नाम पर संपत्तियों का प्रबंधन करती है। रेस्तरां की लीज जून 2025 में समाप्त हो चुकी है। क्राउन एस्टेट ने इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है क्योंकि वह इमारत में बड़े स्तर पर नवीनीकरण और निर्माण कार्य करना चाहता है। योजना के अनुसार, दफ्तरों और रेस्तरां के प्रवेश क्षेत्र में बदलाव कर एक बड़ा रिसेप्शन एरिया बनाया जाएगा। क्राउन एस्टेट का दावा है कि इससे इमारत का व्यावसायिक मूल्य बढ़ेगा। हालांकि रेस्तरां प्रबंधन का कहना है कि यह काम उन्हें हटाए बिना भी किया जा सकता है।
कैसे बना Veeraswamy Restaurant भारतीय खाने की पहचान?
Veeraswamy Restaurant की स्थापना अप्रैल 1926 में हुई थी। इसे ब्रिटेन में भारतीय भोजन संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। पिछले 100 वर्षों में यहां दुनिया की कई बड़ी हस्तियां भोजन कर चुकी हैं। इनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, चार्ली चैपलिन, मार्लन ब्रैंडो, विवियन ली और महारानी एलिजाबेथ द्वितीय जैसे नाम शामिल हैं। रेस्तरां का मूल मेन्यू एडवर्ड पामर ने तैयार किया था। उन्होंने हैदराबाद के शाही व्यंजनों से प्रेरणा लेकर यहां भारतीय स्वाद को ब्रिटिश ग्राहकों तक पहुंचाया। इसी वजह से यह रेस्तरां भारतीय खानपान के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है।
क्यों कहा जाता है कि यहां से शुरू हुई थी नई परंपरा?
Veeraswamy Restaurant को 2016 में प्रतिष्ठित मिशेलिन स्टार सम्मान मिला था। यह पुरस्कार दुनिया के चुनिंदा उत्कृष्ट रेस्तरां को दिया जाता है। इस रेस्तरां से जुड़ा एक दिलचस्प दावा भी काफी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की परंपरा की शुरुआत यहीं से हुई थी। जानकारी के अनुसार, डेनमार्क के राजा जब भी लंदन आते थे तो इसी रेस्तरां में भोजन करते थे। उन्होंने अपनी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक पीपा यहां रखवा दिया था ताकि हर बार उनके लिए वही बीयर परोसी जा सके। यही कारण है कि यह रेस्तरां सिर्फ भोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक इतिहास का हिस्सा भी माना जाता है।
अदालत में क्या होने वाला है और किस बात पर विवाद है?
Veeraswamy Restaurant की मालिक कंपनी MW Eat अब अदालत में अपनी लड़ाई लड़ रही है। 29 जून से सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में इस मामले की पांच दिन तक सुनवाई होगी। क्राउन एस्टेट का कहना है कि 2023 में आई बाढ़ के बाद इमारत के कई कार्यालय खाली पड़े हैं। अब वह पूरे परिसर का पुनर्विकास करना चाहता है ताकि कार्यालयों को बेहतर तरीके से उपयोग में लाया जा सके। दूसरी ओर रेस्तरां प्रबंधन का तर्क है कि निर्माण कार्य उनके व्यवसाय को हटाए बिना भी किया जा सकता है। उनका कहना है कि लीज न बढ़ाने का फैसला अनावश्यक और अनुचित है।
नई जगह पर जाने से कितना बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है?
Veeraswamy Restaurant के मालिकों का कहना है कि यदि उन्हें मौजूदा स्थान छोड़ना पड़ा तो नुकसान केवल स्थानांतरण तक सीमित नहीं रहेगा। लंदन के वेस्ट एंड जैसे महंगे इलाके में नई जगह ढूंढना बेहद कठिन और खर्चीला होगा। इसके अलावा नई रसोई, डाइनिंग एरिया, इंटीरियर, लाइसेंस और अन्य सुविधाएं तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च होंगे। रेस्तरां को कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ सकता है, जिससे आय पूरी तरह रुक जाएगी। कंपनी का अनुमान है कि कुल खर्च 50 लाख पाउंड यानी करीब 57 से 58 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। उनका आरोप है कि क्राउन एस्टेट की ओर से प्रस्तावित मुआवजा इस लागत के मुकाबले बेहद कम है।
क्या Veeraswamy Restaurant अपनी ऐतिहासिक पहचान बचा पाएगा?
Veeraswamy Restaurant की कानूनी लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। यह सिर्फ एक रेस्तरां का मामला नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय विरासत और सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ा मुद्दा बन गया है। यदि अदालत रेस्तरां के पक्ष में फैसला देती है तो यह अपनी ऐतिहासिक जगह पर संचालन जारी रख सकेगा। लेकिन अगर फैसला क्राउन एस्टेट के पक्ष में गया तो लंदन की सबसे प्रतिष्ठित भारतीय पहचान को नई जगह तलाशनी पड़ सकती है। फिलहाल 100 साल पुराने इस रेस्तरां का भविष्य अदालत के फैसले पर टिका हुआ है और दुनिया भर के भारतीय समुदाय की नजर इस मामले पर बनी हुई है।