कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने NEET-UG 2026 की पुनः परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार परीक्षा में हो रही गड़बड़ियों और पेपर लीक के असली नेटवर्क पर कार्रवाई करने के बजाय छात्रों पर ही सख्ती कर रही है। उन्होंने इस कदम को “नाटकीयता” करार देते हुए कहा कि यह समाधान नहीं बल्कि समस्या से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर तीखी टिप्पणी
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह कदम “चोर को पकड़ने के बजाय पीड़ित के दरवाजे पर ताला लगाने” जैसा है। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय सरकार ऐसे कदम उठा रही है जो छात्रों की परेशानी को और बढ़ाते हैं। उनके इस बयान के बाद शिक्षा नीति और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली पर बढ़ता तनाव
देश में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पहले से ही पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में NEET-UG 2026 की पुनः परीक्षा और उससे पहले टेलीग्राम पर प्रतिबंध ने छात्रों के बीच असंतोष को और बढ़ा दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को असली नेटवर्क और संगठित धांधली पर ध्यान देना चाहिए, न कि उन प्लेटफॉर्म्स पर जिनका उपयोग छात्र सूचना साझा करने के लिए करते हैं।
सरकार का रुख और डिजिटल सुरक्षा तर्क
वहीं केंद्र सरकार का पक्ष है कि ऐसे कदम परीक्षा की सुरक्षा और नकल रोकने के लिए जरूरी हैं। सरकार का तर्क है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग परीक्षा में गड़बड़ी फैलाने के लिए किया जा सकता है, इसलिए समय-समय पर सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। हालांकि इस फैसले की आलोचना यह कहते हुए भी की जा रही है कि इससे लाखों छात्रों की तैयारी और संवाद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
शिक्षा और डिजिटल अधिकारों पर नई बहस
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और डिजिटल अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है। एक तरफ जहां सरकार इसे सुरक्षा उपाय बता रही है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों पर अनावश्यक दबाव मान रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ऐसे कदम वास्तव में परीक्षा प्रणाली को मजबूत करेंगे, या फिर छात्रों के भरोसे और पारदर्शिता की मांग को और गहरा करेंगे।