September 8, 2026

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सपा में 25–26 सांसदों के टूटने के दावे से गरमाई यूपी की राजनीति, बयानबाज़ी या रणनीति?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने कानपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान बड़ा दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के 25 से 26 सांसद पार्टी छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं। उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी किसी तरह की तोड़फोड़ की राजनीति नहीं कर रही, बल्कि ये सांसद खुद ही आने वाले समय में भाजपा के साथ जुड़ सकते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

सपा का पलटवार: “यह सिर्फ टीआरपी की राजनीति है”

इन दावों पर समाजवादी पार्टी ने कड़ा पलटवार किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता Shivpal Singh Yadav ने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य ऐसे बयान केवल मीडिया में बने रहने और सुर्खियां बटोरने के लिए देते हैं। सपा का कहना है कि इन दावों का जमीनी स्तर पर कोई आधार नहीं है और यह पूरी तरह राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।

ओम प्रकाश राजभर और अन्य नेताओं के बयान से बढ़ी हलचल

इस विवाद की शुरुआत यूपी सरकार के मंत्री Om Prakash Rajbhar के एक सोशल मीडिया पोस्ट से मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने सपा में बड़ी टूट की संभावना का संकेत दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता Ram Gopal Yadav की केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah से मुलाकात और कुछ मामलों को लेकर चर्चा ने राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बीजेपी और समर्थकों के दावे, सपा पर दबाव की राजनीति का आरोप

बीजेपी खेमे के कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि समाजवादी पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ रहा है और कई नेता भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। इसी संदर्भ में मंत्री Manoj Pandey ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी की स्थिति कमजोर हो रही है और कुछ नेता असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। हालांकि इन सभी बयानों को सपा खारिज करते हुए इसे पूरी तरह राजनीतिक अफवाह बता रही है।

बड़ा सवाल: टूट या सिर्फ चुनावी रणनीति?

फिलहाल इस पूरे मामले में किसी भी तरह के ठोस सबूत या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी 2027 चुनाव से पहले माहौल बनाने और विपक्ष पर दबाव डालने की रणनीति भी हो सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी के भीतर वास्तव में कोई ब

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