केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई तीन-भाषा नीति को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसके क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की जानी है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को पहले से लंबित समान याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए 14 जुलाई को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले भी विस्तृत बहस हो चुकी है, इसलिए फिलहाल किसी प्रकार की अंतरिम राहत या स्थगन आदेश देने का कोई आधार नहीं बनता। याचिका Friends of People for Active Democracy नामक गैर-सरकारी संगठन की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें तीन-भाषा नीति का विरोध नहीं बल्कि उसके क्रियान्वयन के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार, CBSE और NCERT को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दे चुका है।
CBSE की नई भाषा नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप तैयार की गई है। बोर्ड के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होना आवश्यक है। विदेशी भाषा पढ़ने के इच्छुक छात्र इसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुन सकेंगे, जब वे दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर रहे हों। इसके अतिरिक्त विदेशी भाषा को चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में भी लिया जा सकेगा। छात्रों पर परीक्षा का अतिरिक्त दबाव न बढ़े, इसके लिए CBSE ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा (R3) की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा और प्राप्त अंक प्रमाणपत्र में दर्ज किए जाएंगे। साथ ही किसी भी छात्र को केवल R3 विषय के कारण बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।
नई नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए CBSE ने कई वैकल्पिक व्यवस्थाओं की भी अनुमति दी है। जिन स्कूलों में संबंधित भाषा के शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, वहां अन्य विषयों के ऐसे शिक्षकों की सेवाएं ली जा सकेंगी जिन्हें उस भाषा का कार्यात्मक ज्ञान हो। इसके अलावा इंटर-स्कूल संसाधन साझा करने, ऑनलाइन एवं हाइब्रिड शिक्षण, सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों की नियुक्ति और योग्य स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों की सेवाएं लेने का विकल्प भी दिया गया है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) को कानून के तहत आवश्यक छूट प्रदान की जाएगी, जबकि विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को मामले-दर-मामले के आधार पर दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है। इसी के साथ CBSE ने 2026-27 से कक्षा 9 में गणित और विज्ञान विषयों के लिए दो-स्तरीय प्रणाली लागू करने की भी घोषणा की है, जिसमें स्टैंडर्ड और एडवांस्ड स्तर के विकल्प उपलब्ध होंगे।