दिल्ली में हुई एक मुलाकात सिर्फ औपचारिक घटना नहीं थी। यह दक्षिण एशिया की राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति में उथल-पुथल का संकेत बनकर उभरी।बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) खलीलुर रहमान और भारत के NSA अजीत डोभाल के बीच हुई इस मुलाकात ने कई नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं। खास बात यह रही कि इसी दौरान रहमान ने डोभाल को ढाका आने का खुला निमंत्रण दिया।यह निमंत्रण एक सामान्य कूटनीतिक आमंत्रण नहीं था; इसके पीछे कई राजनीतिक संदेश छिपे हैं।
बांग्लादेश का राजनीतिक तूफान हसीना भारत में
बांग्लादेश इस समय भारी राजनीतिक संकट से गुजर रहा है।पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाया जा चुका है और हिंसा के बढ़ते खतरे के बीच वह भारत में शरण ले चुकी हैं।ढाका की मौजूदा सरकार अब हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।
यानी भारत पर सीधा दबाव एक ऐसे नेता को सौंपने का, जिसके शासनकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में स्थिरता थी और सुरक्षा सहयोग भी मजबूत हुआ था।
कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन और रणनीतिक संकेत
यह मुलाकात 7th Colombo Security Conclave (CSC) के दौरान हुई। इस मंच का मकसद है—
क्षेत्रीय सुरक्षा
आतंकवाद विरोधी सहयोग
समुद्री रक्षा
साइबर सुरक्षाभारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और मॉरीशस इसके महत्वपूर्ण सदस्य हैं। ऐसे समय में रहमान द्वारा डोभाल को ढाका बुलाना यह संकेत देता है कि बांग्लादेश भारत को सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि सुरक्षा साझेदार के रूप में देखना चाहता है, भले ही राजनीतिक टकराव मौजूद हो।

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