लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव का एक कदम अक्सर चर्चाओं में आ जाता है। हाल ही में लखनऊ में समाजवादी पार्टी के नेता अब्बास हैदर द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में अखिलेश यादव की उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस इफ्तार पार्टी को आगामी चुनावों की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
इफ्तार पार्टी में दिखी सियासी गर्मी
रमज़ान के इस पवित्र महीने में देशभर में इफ्तार पार्टियों का आयोजन किया जाता है, लेकिन जब यह आयोजन किसी बड़े राजनीतिक नेता द्वारा किया जाए और उसमें प्रदेश की सियासी शख्सियतें शामिल हों, तो इसका राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है। लखनऊ में हुई इस इफ्तार पार्टी में समाजवादी पार्टी के कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
अखिलेश यादव की उपस्थिति ने यह साफ संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी मुस्लिम समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रही है। इस मौके पर अखिलेश यादव ने एकजुटता और भाईचारे का संदेश दिया और कहा कि “रमज़ान का महीना हमें प्रेम, करुणा और समाज में सद्भाव बनाए रखने की सीख देता है।”
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मुस्लिम वोटबैंक को साधने की कोशिश?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक का बड़ा असर है। खासकर 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद, समाजवादी पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव करती दिख रही है। SP को यह भली-भांति पता है कि मुस्लिम मतदाताओं को अपने साथ रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह तबका उत्तर प्रदेश में चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
इफ्तार पार्टी में अखिलेश यादव की मौजूदगी को मुस्लिम समाज के साथ मजबूती से खड़े रहने का संकेत माना जा रहा है। इससे पहले भी अखिलेश यादव कई मौकों पर मुसलमानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उन्होंने इस दौरान कहा कि “समाजवादी पार्टी हमेशा से ही हर वर्ग के साथ खड़ी रही है और आगे भी रहेगी।”
बीजेपी और अन्य दलों की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव की इस इफ्तार पार्टी में शिरकत पर भाजपा और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आई। भाजपा के नेताओं ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया और कहा कि समाजवादी पार्टी केवल मुस्लिम वोट बैंक के लिए ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेती है। वहीं, कांग्रेस और बसपा ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समाजवादी पार्टी द्वारा मुस्लिम समाज को लुभाने की एक रणनीति हो सकती है।
अब्बास हैदर की भूमिका और महत्व
अब्बास हैदर समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख मुस्लिम नेता हैं और लखनऊ की सियासत में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनकी इफ्तार पार्टी में अखिलेश यादव की उपस्थिति यह दर्शाती है कि पार्टी मुस्लिम समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। यह माना जा रहा है कि इस आयोजन के जरिए समाजवादी पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह मुस्लिम समाज के हितों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार है।
समाजवादी पार्टी की रणनीति और आगामी चुनाव
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए समाजवादी पार्टी अपने सामाजिक समीकरणों को फिर से मजबूत करने में जुटी हुई है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य भाजपा को कड़ी टक्कर देना है और इसके लिए उसे मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का समर्थन बनाए रखना होगा।
2022 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को मुस्लिम मतदाताओं का काफी समर्थन मिला था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में यह वोट बैंक बंटता नजर आया। इस स्थिति को देखते हुए अखिलेश यादव मुस्लिम नेताओं और समाज के प्रमुख चेहरों के साथ संपर्क बढ़ाने में लगे हुए हैं।
क्या यह रणनीति सफल होगी?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए अखिलेश यादव को अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर चलना होगा। मुस्लिम समाज में पहले से ही समाजवादी पार्टी की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है, लेकिन AIMIM जैसी पार्टियों के उभरने से यह वोट बैंक पूरी तरह से SP के पक्ष में नहीं रहा। ऐसे में अखिलेश यादव की इफ्तार पार्टी में शिरकत को एक बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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