बाबा बागेश्वर की दूसरी पदयात्रा: 131 किमी का पवित्र संकल्प

बाबा बागेश्वर की 131 किमी की दूसरी पदयात्रा 7 नवंबर से शुरू होगी। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 400 गांवों से गुजरते हुए यह यात्रा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लेगी।

बाबा बागेश्वर, जिनका नाम आस्था और धर्म के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है, एक बार फिर अपने संकल्प को साकार करने के लिए पदयात्रा पर निकलने जा रहे हैं। यह उनकी दूसरी पदयात्रा होगी, जो 7 नवंबर 2025 से शुरू होकर 10 दिनों तक चलेगी। 131 किलोमीटर की इस यात्रा में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लगभग 400 गांवों और शहरों को जोड़ा जाएगा, जहां अनुमानित पांच करोड़ लोग निवास करते हैं। इस यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक जागरूकता ही नहीं, बल्कि भारत को हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प भी है।

पानीपत, हरियाणा में एक कथा सत्र के दौरान बाबा बागेश्वर ने इस पवित्र यात्रा की घोषणा की। उन्होंने कहा, “हमारी पहली पदयात्रा नवंबर 2024 में हुई थी, जिसमें लाखों हिंदुओं ने हिस्सा लिया था। इस बार हम और बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचना चाहते हैं।” उनकी पहली यात्रा 160 किलोमीटर की थी, जिसमें भारत और विदेशों से लोग शामिल हुए थे। फिल्म जगत, उद्योगपति और समाजसेवी भी उस यात्रा का हिस्सा बने थे। इस बार की यात्रा को और व्यापक बनाने के लिए बाबा बागेश्वर ने विशेष योजना बनाई है।

बाबा बागेश्वर का कहना है कि उनकी यह यात्रा उन गरीब और वंचित लोगों तक पहुंचने का माध्यम है, जो किराए की कमी या VIP प्रोटोकॉल के कारण बागेश्वर धाम नहीं पहुंच पाते। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “बड़े लोग तो प्रोटोकॉल के साथ मुझसे मिल लेते हैं, लेकिन मेरे गरीब भाई-बहन मुझ तक नहीं पहुंच पाते। मैं खुद उनके घर जाऊंगा, उन्हें गले लगाऊंगा और उनके दुख-दर्द को सुनूंगा।” यह यात्रा न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक होगी।

पानीपत की कथा में बाबा बागेश्वर ने अपने संदेश को और स्पष्ट करते हुए कहा, “हालेलुयाह कहने वालों, कान खोलकर सुन लो। हम वो हिंदू हैं, जो गोली खा लेते हैं, लेकिन कलमा नहीं पढ़ते। हम सर कटा लेते हैं, लेकिन वतन को मिटने नहीं देते।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह अपनी पहचान और धर्म के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। “मैं 10 रुपये के लिए अपनी दुकान का नाम बदलने वालों में से नहीं हूं। मैं जैसा हूं, वैसा ही रहूंगा और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने तक चैन से नहीं बैठूंगा।” उनके ये शब्द श्रोताओं में जोश और उत्साह भर गए।

यह पदयात्रा एक आंदोलन का रूप लेगी, जिसमें लाखों लोग शामिल होने की उम्मीद है। बाबा बागेश्वर का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि हिंदू संस्कृति और एकता को मजबूत करने का प्रयास है। यात्रा के दौरान वह गांव-गांव जाकर लोगों से मिलेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और उन्हें आशीर्वाद देंगे। यह यात्रा सामाजिक और धार्मिक एकता का संदेश लेकर पूरे क्षेत्र में फैलेगी।

बाबा बागेश्वर की इस यात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लोग उत्साहित हैं। उनकी पहली यात्रा की तरह ही इस बार भी विभिन्न क्षेत्रों के लोग इसमें हिस्सा लेंगे। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगी, बल्कि सामाजिक बदलाव और एकता का भी संदेश देगी। बाबा बागेश्वर का यह संकल्प भारत के हर कोने में गूंजेगा और लाखों लोगों को प्रेरित करेगा।

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