फ्रांस में आयोजित G7 Summit 2026 दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं का ऐसा मंच बन गया है, जहां केवल औपचारिक मुलाकातें ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण विमर्श भी हो रहे हैं। 15 से 17 जून तक चल रहे इस शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, फ्रांस के राष्ट्रपति और अन्य प्रमुख देशों के नेता शामिल हुए। सम्मेलन की तस्वीरों में नेताओं के बीच मुस्कुराहट और हाथ मिलाने के दृश्य जरूर दिखाई दिए, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन तस्वीरों के पीछे कई गंभीर वैश्विक चुनौतियों की छाया साफ नजर आ रही है। दुनिया इस समय युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और कूटनीतिक तनावों के दौर से गुजर रही है, ऐसे में G7 Summit पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक व्यापार विवाद बने मुख्य एजेंडा
इस बार के G7 Summit का एजेंडा बेहद व्यापक और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक व्यापार विवाद, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिमी देशों की रणनीतिक चुनौतियां चर्चा के केंद्र में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन मुद्दों ने केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित नहीं किया है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाला है। कई देशों को महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और निवेश संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में G7 देशों के लिए सामूहिक रणनीति बनाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में लोकतांत्रिक देशों की भूमिका और सहयोग को किस तरह मजबूत किया जाए।
मोदी-ट्रंप मुलाकात ने खींचा सबसे ज्यादा ध्यान, कूटनीतिक संकेतों पर नजर
G7 Summit के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर रही। दोनों नेताओं के बीच पिछले 16 महीनों में यह पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। हालांकि मुलाकात को औपचारिक बताया गया, लेकिन इसके राजनीतिक और रणनीतिक मायने काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत को आने वाले समय की द्विपक्षीय नीतियों और वैश्विक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। सम्मेलन में मौजूद अन्य नेताओं की तरह मोदी और ट्रंप की मुलाकात भी कैमरों का केंद्र बनी रही और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे विशेष महत्व दिया।
ट्रंप की नीतियों को लेकर यूरोपीय देशों की चिंता, एकजुटता का संदेश देने की कोशिश
सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूक्रेन, ईरान और वैश्विक व्यापार से जुड़ी नीतियों को लेकर कई यूरोपीय देशों में चिंता बनी हुई है। कुछ मुद्दों पर अमेरिका और यूरोपीय देशों के दृष्टिकोण में अंतर देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में फ्रांस के राष्ट्रपति और मेजबान देश की कोशिश रही कि सम्मेलन से सहयोग और एकजुटता का संदेश जाए। कई द्विपक्षीय बैठकों और सामूहिक चर्चाओं के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई कि मतभेदों के बावजूद प्रमुख लोकतांत्रिक देश वैश्विक चुनौतियों का सामना मिलकर करना चाहते हैं। हालांकि बॉडी लैंग्वेज विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने कई तस्वीरों और बैठकों में औपचारिकता का स्तर अपेक्षाकृत अधिक होने की ओर भी संकेत किया है।
क्या G7 Summit दुनिया की चुनौतियों का समाधान खोज पाएगा?
G7 Summit 2026 केवल एक कूटनीतिक आयोजन नहीं बल्कि उस बदलती दुनिया का प्रतिबिंब है जो युद्ध, आर्थिक दबाव, सुरक्षा चुनौतियों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। सम्मेलन में शामिल नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती साझा हितों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने की है। दुनिया यह देख रही है कि क्या यह मंच यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसे मुद्दों पर कोई ठोस दिशा दे पाएगा। फिलहाल सम्मेलन की तस्वीरें और चर्चाएं यही संकेत दे रही हैं कि विश्व व्यवस्था एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। आने वाले दिनों में G7 Summit से निकलने वाले फैसले न केवल सदस्य देशों बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वैश्विक नेता साझा समाधान निकालने में सफल होंगे या फिर मौजूदा मतभेद दुनिया के सामने खड़ी चुनौतियों को और जटिल बना देंगे।