अमेरिका-पाकिस्तान की साजिश: कैसे निक्सन से ट्रंप तक भारत को घेरने की चाल

अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते इतिहास में कई बार भारत के लिए चिंता का कारण बन चुके हैं। 1971 में जब भारत ने बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई में पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोला था, तब अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। अब लगभग आधी सदी बाद, वही तस्वीर रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप के दौर में फिर से बनती दिख रही है।

निक्सन से ट्रंप तक पाकिस्तान प्रेम

रिचर्ड निक्सन ने न केवल पाकिस्तान के तानाशाह याह्या खान का समर्थन किया, बल्कि भारत को डराने के लिए अमेरिकी नौसेना का सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी तक भेज दिया था। निक्सन ने उस समय चीन और पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ एक रणनीतिक गठबंधन बनाने की कोशिश की थी। जब वाइट हाउस के गुप्त टेप साल 2005 में सार्वजनिक हुए, तब यह भी सामने आया कि निक्सन ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए अपशब्द कहे थे।

डोनाल्ड ट्रंप भी उसी रास्ते पर चलते दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में लंच पर बुलाकर “पाकिस्तान से प्यार” का इजहार किया, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है।

परमाणु ताकत बनाने में अमेरिका की भूमिका

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की नींव भी अमेरिकी मदद से रखी गई थी। 1953 में अमेरिका ने अपने “शांति के लिए परमाणु” कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान को पहला समर्थन दिया। 1960 के दशक में पाकिस्तान के वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान को यूरोप में यूरेनियम संवर्धन की तकनीक सिखाई गई, और 1975 में वे चोरी हुए गैस सेंट्रीफ्यूज के ब्लूप्रिंट के साथ पाकिस्तान लौटे। यह सब कुछ CIA की जानकारी में था, फिर भी उन्हें रोका नहीं गया।

साल 1972 में पाकिस्तान ने ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो के नेतृत्व में अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम की शुरुआत की और 1986 तक उसने परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी सामग्री तैयार कर ली थी।

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ट्रंप-मुनीर मुलाकात का गुप्त संदेश

हाल ही में ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख से जो मुलाकात की, उसके पीछे कई रणनीतिक उद्देश्य माने जा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ईरान और इज़रायल के बीच चल रहे संघर्ष में पाकिस्तान को एक रणनीतिक प्रॉक्सी के रूप में देख रहा है। पाकिस्तान और ईरान की 750 किमी लंबी सीमा है, और पाकिस्तान की जमीन से आतंकी संगठन जैश-उल-अदल ईरान पर हमले करते रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान अमेरिका के लिए एक आदर्श प्रॉक्सी राष्ट्र बनता है।

भारत के लिए क्या है सबक?

भारत को अमेरिका-पाकिस्तान के इस पुराने गठजोड़ से सतर्क रहना होगा। जैसा कि 1971 में भारत ने सोवियत संघ से रक्षा समझौता करके अमेरिका-चीन-पाक गठबंधन को धता बताया था, वैसे ही आज भारत को अपने सामरिक और कूटनीतिक रिश्तों को और मजबूत करना होगा।

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