PM Janman Yojana और PM-AJAY से करोड़ों लोगों को फायदा
देश के सबसे पिछड़े और दूरदराज़ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार की PM Janman Yojana तेजी से काम कर रही है। सरकार की ओर से जारी नई फैक्टशीट के मुताबिक, इस योजना के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पक्के घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के जरिए उन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जो दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे हैं। नवंबर 2023 में शुरू हुई PM Janman Yojana का बजट 24,104 करोड़ रुपये रखा गया है। यह कार्यक्रम देश के 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 PVTG समुदायों को सीधे लाभ पहुंचा रहा है।
PM Janman Yojana के जरिए कैसे बदली जा रही है आदिवासी इलाकों की तस्वीर?
PM Janman Yojana को बहु-आयामी विकास कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है। योजना के तहत केंद्र सरकार ने 9 मंत्रालयों को एक मंच पर लाकर 11 प्रमुख क्षेत्रों में काम शुरू किया है। इन क्षेत्रों में सुरक्षित आवास, सड़क निर्माण, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर को स्थायी रूप से बेहतर बनाना है। योजना के अंतर्गत मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, आंगनवाड़ी केंद्र, छात्रावास, मोबाइल टावर और बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाएं तेजी से विकसित की जा रही हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सरकारी सेवाओं का लाभ मिलने लगा है।
7.8 लाख पक्के घर और लाखों परिवारों तक पहुंची बुनियादी सुविधाएं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार PM Janman Yojana के तहत अब तक 7.8 लाख से अधिक पक्के घरों का निर्माण किया जा चुका है। इसके अलावा 28,303 से ज्यादा गांवों तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाया गया है। बिजली की पहुंच बढ़ाने के लिए 5,89,812 परिवारों को नए बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों में वर्षों से बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, वहां अब लोगों का जीवन पहले की तुलना में काफी बेहतर हुआ है। सड़क और संचार सुविधाओं के विस्तार से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव आदिवासी क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
PM Janman Yojana में शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर क्यों है खास जोर?
PM Janman Yojana केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और कौशल विकास पर भी विशेष फोकस कर रही है। जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 तक देश के 499 स्कूलों में 1.56 लाख से अधिक छात्र दाखिला ले चुके हैं। इसके अलावा 323 नए स्कूलों का निर्माण भी जारी है। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए वोकेशनल स्किल ट्रेनिंग और वन धन विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आय बढ़ाना है।
PM-AJAY Scheme से अनुसूचित जाति समुदायों को कैसे मिल रहा लाभ?
PM Janman Yojana के साथ-साथ केंद्र सरकार अनुसूचित जाति समुदायों के लिए भी कई योजनाएं चला रही है। इनमें PM-AJAY Scheme एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2021 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति बहुल गांवों का समग्र विकास करना है। इसके तहत बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने, रोजगार सृजन और कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है। योजना का ‘आदर्श ग्राम’ मॉडल गांवों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता देता है। वर्तमान में यह कार्यक्रम 26 राज्यों के 597 जिलों के 47,334 गांवों में संचालित किया जा रहा है। सरकार के अनुसार इस योजना से 4 करोड़ से अधिक नागरिकों और लगभग 83 लाख परिवारों को लाभ मिल रहा है।
गांवों में विकास की कमियां दूर करने के लिए क्या रणनीति अपनाई गई?
सरकार ने PM Janman Yojana और PM-AJAY Scheme के तहत गांव स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। अधिकारियों ने 25,000 से अधिक गांवों में जाकर बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत आकलन किया है। इस प्रक्रिया के जरिए सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं और महिलाओं को विकास प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।
क्या सबसे पिछड़े समुदायों तक पहुंच रहा है विकास का लाभ?
PM Janman Yojana का सबसे बड़ा उद्देश्य देश के उन समुदायों तक विकास पहुंचाना है, जो लंबे समय से मुख्यधारा से दूर रहे हैं। सरकार का दावा है कि योजना के जरिए बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण पर भी काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से परियोजनाएं आगे बढ़ती रहीं तो आने वाले वर्षों में आदिवासी और वंचित समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक संकेतकों में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।