Raksha Bandhan: सिर्फ भाई-बहन का त्योहार नहीं, जानें राखी का इतिहास और खास परंपराएं
Raksha Bandhan
Raksha Bandhan सिर्फ भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। सावन माह की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में साथ निभाने का वचन देते हैं। यह परंपरा केवल सगे भाई-बहनों तक सीमित नहीं, बल्कि रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच भी निभाई जाती है।
रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाएं
Raksha Bandhan से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। महाभारत की प्रचलित कथा में द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की उंगली पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था, जिसे रक्षा के भाव से जोड़ा जाता है। माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा भी राखी की परंपरा से जुड़ी मानी जाती है। इसके अलावा यमराज और यमुना की कहानी में बहन द्वारा भाई को रक्षा सूत्र बांधने का उल्लेख मिलता है। इंद्र और शुचि की प्रचलित कथा में भी रक्षा सूत्र को शक्ति और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
इतिहास में राखी और सामाजिक एकता का संदेश
Raksha Bandhan केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं रहा है। सिकंदर की पत्नी और राजा पुरु की प्रचलित कथा तथा रानी कर्णावती और हुमायूं से जुड़ा प्रसंग भी राखी के इतिहास में चर्चित है। वहीं बंगाल विभाजन के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने राखी को हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर सामाजिक भाईचारे और एकता का संदेश दिया। इस तरह रक्षाबंधन ने पारिवारिक रिश्तों के साथ सामाजिक सद्भाव को भी मजबूत किया।
श्रावण पूर्णिमा पर देशभर में अलग-अलग परंपराएं
Raksha Bandhan के साथ श्रावण पूर्णिमा देश के अलग-अलग हिस्सों में कई अन्य परंपराओं से भी जुड़ी है। महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में नारली पूर्णिमा पर समुद्र देवता की पूजा की जाती है। दक्षिण भारत में अवनि अवित्तम या उपाकर्म के दौरान यज्ञोपवीत बदलने की परंपरा है। उत्तर भारत में कजरी पूर्णिमा पर महिलाएं अच्छी फसल और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में झूलन पूर्णिमा पर राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है।
राखी बाजार में हजारों करोड़ के कारोबार की उम्मीद
Raksha Bandhan को लेकर बाजारों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। CAIT के अनुमान के अनुसार, राखी का कारोबार करीब 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि मिठाई, उपहार, कपड़े और अन्य उत्पादों सहित कुल कारोबार 30,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। इस बार पारंपरिक राखियों के साथ विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्र रक्षा जैसे थीम वाली राखियां भी बाजार में हैं। खादी, जूट, बीज और मधुबनी कला जैसी स्थानीय राखियां महिला उद्यमियों और कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही हैं।
