तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर कांग्रेस ने आखिरकार अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को इन अटकलों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी से हुई मुलाकातों का पार्टी विलय से कोई संबंध नहीं है। वेणुगोपाल के अनुसार, ये बैठकें केवल विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA Alliance) को मजबूत करने और केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थीं। उन्होंने कहा कि विपक्षी एकता समय की जरूरत है और सभी दल लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं।
TMC-Congress: ममता-सोनिया और राहुल-अभिषेक की मुलाकातों से तेज हुई थीं चर्चाएं
दरअसल, टीएमसी और कांग्रेस के विलय की चर्चाएं उस समय तेज हो गई थीं जब ममता बनर्जी ने नई दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इसके अगले ही दिन टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से वन-टू-वन बैठक की। लगातार दो दिनों में हुई इन हाई-प्रोफाइल बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जाने लगे कि टीएमसी का कांग्रेस में पुनर्विलय हो सकता है। हालांकि कांग्रेस के साथ-साथ टीएमसी ने भी इन खबरों का खंडन किया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी विधायक दल के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि पार्टी के कांग्रेस में विलय की कोई संभावना नहीं है और ऐसी खबरें केवल राजनीतिक अटकलें हैं।
महंगाई-बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस का तीन महीने का राष्ट्रीय अभियान
इस बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ तीन महीने तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा भी की है। पार्टी महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों, सामाजिक असमानता और विदेश नीति जैसे मुद्दों को लेकर देशभर में अभियान चलाएगी। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस का हर नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर इन मुद्दों को उठाएगा। वहीं, राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मामले में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है। नामांकन केवल एक न्यायिक नोटिस का उल्लेख न होने के कारण खारिज हुआ था। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा तकनीकी मामला बताते हुए विपक्षी नेताओं के साथ भेदभाव का आरोप भी लगाया।