TMC Crisis News: सांसदों के इस्तीफे से बढ़ी ममता की मुश्किलें
पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC Crisis लगातार गहराता नजर आ रहा है। पार्टी के भीतर असंतोष की खबरों के बीच अब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी की खुली नाराजगी सामने आई है। उन्होंने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी को तय करना होगा कि वे उनके साथ हैं या अभिषेक के साथ। इसी बीच राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे, बागी नेताओं के आरोप और पार्टी के भीतर टूट की चर्चाओं ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
आखिर कल्याण बनर्जी क्यों हुए नाराज, क्या है पूरा विवाद?
बढ़ते TMC Crisis के बीच कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराजगी की वजह भी सार्वजनिक कर दी। उन्होंने कहा कि फर्जी हस्ताक्षर मामले से जुड़े केस में उन्हें बिना जानकारी दिए वकीलों की टीम से हटा दिया गया। कल्याण बनर्जी के मुताबिक उन्हें आधी रात में बताया गया कि केस में वकील बदल दिए गए हैं। उन्होंने इसे अपमानजनक बताते हुए कहा कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को सम्मान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना नहीं आता और उनका व्यवहार अहंकारी है। कल्याण ने यहां तक कह दिया कि अगर ममता बनर्जी को सिर्फ अभिषेक पर भरोसा है तो वह उनके साथ रहें, अन्यथा वह ममता के साथ खड़े हैं।
क्या सांसदों के इस्तीफों ने बढ़ा दिया है TMC Crisis?
मौजूदा TMC Crisis की सबसे बड़ी वजह पार्टी से लगातार हो रहे इस्तीफे भी माने जा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने गुरुवार को पार्टी और अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर भी पार्टी छोड़ चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में राज्यसभा के कई नेताओं के इस्तीफे ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफे के बाद कहा कि पश्चिम बंगाल में जनता ने भाजपा के पक्ष में जनादेश दिया और उन्हें लगा कि मौजूदा परिस्थितियों में पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने अपने भविष्य की राजनीतिक योजना पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया।
बागी नेताओं के दावों से क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल?
TMC Crisis के बीच पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष ने दावा किया था कि करीब 20 लोकसभा सांसद अलग गुट का समर्थन कर चुके हैं। इसके अलावा 58 विधायकों के भी अलग होने की चर्चा ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पार्टी के भीतर अस्थिरता की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ बागी नेताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी में लंबे समय से नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही थी। दूसरी ओर तृणमूल नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी अभी भी मजबूत स्थिति में है और अधिकांश नेता संगठन के साथ हैं।
अभिषेक बनर्जी पर क्यों लग रहे हैं लगातार आरोप?
बढ़ते TMC Crisis में अभिषेक बनर्जी सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में हैं। कई असंतुष्ट नेताओं ने उन पर पार्टी के भीतर फैसले केंद्रीकृत करने और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। बागी नेता रिजु दत्ता ने भी सार्वजनिक रूप से अभिषेक की आलोचना की और दावा किया कि पार्टी के कई नेताओं को वर्षों तक अपमान का सामना करना पड़ा। वहीं कल्याण बनर्जी के बेटे शिरसान्य बंदोपाध्याय ने भी कहा कि अभिषेक लोगों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि अभिषेक बनर्जी या उनके समर्थकों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल स्थिति को संभालने में जुटा हुआ दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस और TMC के रिश्तों को लेकर क्या चल रही चर्चा?
TMC Crisis के बीच कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संभावित विलय की चर्चाएं भी सामने आईं। हालांकि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की सोनिया गांधी और राहुल गांधी से हुई मुलाकात सामान्य राजनीतिक बैठक थी। इसका किसी विलय या राजनीतिक समझौते से कोई संबंध नहीं है। हाल के दिनों में विपक्षी दलों के बीच बढ़ते संवाद को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।
क्या कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ सकती है TMC Crisis?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में TMC Crisis कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर और गहरा सकता है। यदि बागी सांसदों और विधायकों के दावे सही साबित होते हैं तो दल-बदल कानून और पार्टी की वैधता को लेकर नए विवाद खड़े हो सकते हैं। साथ ही पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को मनाने और संगठन में बदलाव के जरिए नुकसान कम करने की कोशिश कर सकता है। दूसरी तरफ भाजपा और अन्य विपक्षी दल भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि तृणमूल कांग्रेस का भविष्य किस दिशा में जाएगा और पार्टी के भीतर चल रहा यह संकट आने वाले दिनों में कितना बड़ा राजनीतिक असर डालेगा।