उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान भारत–पाकिस्तान क्रिकेट मैच पर केंद्र सरकार पर हमला

मैच को लेकर सियासी हंगामा

भारत–पाकिस्तान क्रिकेट मैच ने राजनीति में भी तहलका मचा दिया है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस मैच को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है। ठाकरे ने कहा कि आज देशभक्ति का कारोबार हो रहा है और असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बार-बार पाकिस्तान का नाम लिया जा रहा है।उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रक्षा मंत्री कह सकते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर अब खत्म हो गया है। उनका कहना है कि ऐसे गंभीर मुद्दों के बीच क्रिकेट मैच की प्राथमिकता पर सवाल उठना लाजिमी है।

लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी का जिक्र

ठाकरे ने लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी का भी ज़िक्र किया और कहा कि जिन्हें कभी अंधभक्तों ने “पाकिस्तान की बहन” कहा था, उनके लिए सरकार क्या करेगी। उन्होंने सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्टता दिखाने की अपील की।

शिवसेना का विरोध और बहिष्कार

ठाकरे ने ऐलान किया कि शिवसेना इस मैच का पूरे राज्य में विरोध करेगी। उनका कहना है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सच्चा स्टैंड लेना चाहते हैं, तो उन्हें इस मैच का बहिष्कार करना चाहिए।ठाकरे ने यह भी सवाल उठाया कि अगर बीसीसीआई सचिव जय शाह मैच देखने जाते हैं, तो क्या उन्हें भी देशद्रोही कहा जाएगा? और क्या आम लोग जो टीवी पर मैच देखेंगे, उन्हें भी देशद्रोही ठहराया जाएगा?

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण

ठाकरे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर खेल आयोजनों के बहिष्कार की मिसाल भी दी। उन्होंने याद दिलाया कि—1980 में रूस के अफगानिस्तान हमले के बाद अमेरिका और 60 देशों ने मॉस्को ओलंपिक का बहिष्कार किया।1984 में रूस ने लॉस एंजेलेस ओलंपिक का बहिष्कार किया।2022 में बीजिंग विंटर ओलंपिक में अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा सहित कई देशों ने हिस्सा नहीं लिया।ठाकरे ने कहा कि जब बड़े देश खेल आयोजनों का बहिष्कार कर सकते हैं, तो भारत क्यों नहीं कर सकता।

सवाल जनता के लिए

उद्धव ठाकरे के बयान के बाद सवाल उठता है क्या क्रिकेट मैच वाकई देशभक्ति से बड़ा हो गया है? क्या राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दों के बीच खेल की प्राथमिकता ठीक है?यह बहस न केवल खेल और राजनीति के बीच संतुलन पर सवाल उठाती है, बल्कि यह दर्शाती है कि देशवासियों की भावनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान को ध्यान में रखना भी कितना महत्वपूर्ण है।

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