UP: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.86 लाख शिक्षक अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) या केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) पास नहीं कर सके हैं। इसके बावजूद ये शिक्षक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इस बीच इन शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी योग्यता हासिल करने की समय-सीमा एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है। अब इन शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर मिलेगा। राज्य सरकार ने कोर्ट के आदेश के अनुपालन में शिक्षकों का विवरण जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और विशेष टीईटी परीक्षा आयोजित करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, इन 1.86 लाख शिक्षकों में करीब 50 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी न होने के कारण अब तक टीईटी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे। ऐसे शिक्षकों को राहत देने के लिए प्रदेश सरकार ने न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता संबंधी नियमों में कुछ छूट देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग विशेष टीईटी परीक्षा आयोजित करने की तैयारी कर रहा है ताकि अधिक से अधिक शिक्षक आवश्यक योग्यता प्राप्त कर सकें। इस संबंध में विशेष सचिव बेसिक शिक्षा अवधेश कुमार तिवारी ने शिक्षा निदेशक (बेसिक) को निर्देश जारी करते हुए सभी जिलों से ऐसे शिक्षकों का विवरण एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है जिन्होंने अभी तक टीईटी या सीटीईटी पास नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में सुनाए गए आदेश में पूर्व निर्धारित समय-सीमा 31 अगस्त 2027 को बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया है। अदालत ने यह भी कहा है कि राज्यों को टीईटी परीक्षा नियमित रूप से और संभव हो तो वर्ष में दो बार आयोजित करनी चाहिए ताकि शिक्षकों को योग्यता प्राप्त करने का पर्याप्त अवसर मिल सके। सरकार का मानना है कि इस अतिरिक्त समय और विशेष परीक्षा के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षक पात्रता प्राप्त कर सकेंगे, जिससे विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।