US Navy Attack on Indian Sailors: भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना की कथित कार्रवाई के बाद भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारत में अमेरिकी मिशन के कार्यवाहक दूत जेसन मीक्स को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। साउथ ब्लॉक में हुई बैठक के दौरान भारतीय पक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक बल का प्रयोग पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने और समुद्री मार्गों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इससे पहले भी जेसन मीक्स को इसी मामले में तलब किया जा चुका है, जो भारत की गंभीर चिंता को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार अमेरिकी नौसेना ने इस सप्ताह चार दिनों के भीतर तीन अलग-अलग व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया। पहला हमला 8 जून को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर ‘मारिवेक्स’ पर हुआ, जिस पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। इसके बाद 10 जून को दूसरे टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर हमला हुआ, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। तीसरा हमला 11 जून को गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले टैंकर ‘जलवीर’ पर हुआ, जिस पर 20 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। इन घटनाओं ने भारत में गहरी चिंता पैदा कर दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि इन जहाजों पर भारतीय नागरिक सवार थे और उनकी सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भारत ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चलने वाले नागरिक जहाजों को निशाना बनाना वैश्विक समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। हालांकि अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कुछ जहाजों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू थे और वे नियमों के उल्लंघन के दायरे में आते थे, लेकिन भारत का मानना है कि प्रतिबंधों की आड़ में नागरिकों की जान जोखिम में डालना उचित नहीं है। भारतीय सरकार ने मृतक नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की है। इस घटनाक्रम पर अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है।