PoK Protest
PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में बीते कई महीनों से स्थानीय लोगों का सरकार और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। 13 अगस्त को हुए प्रदर्शन में आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल सरदार अमान खान ने पाकिस्तानी हुकूमत और सेना पर तीखा हमला बोला। रावलाकोट के ईदगाह मैदान से उन्होंने पाकिस्तानी सेना से PoK खाली करने के लिए समय सीमा तय करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि PoK में लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर लोगों में असंतोष बना हुआ है।
13 अगस्त 1948 के UN प्रस्ताव का प्रदर्शन में किया गया जिक्र
सरदार अमान खान और प्रदर्शनकारियों ने 13 अगस्त 1948 को संयुक्त राष्ट्र के भारत-पाकिस्तान आयोग के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के आयोजकों के अनुसार, उस ऐतिहासिक प्रस्ताव में पाकिस्तान से जुड़ी सैन्य और नागरिक व्यवस्थाओं तथा आगे की प्रक्रिया को लेकर प्रावधानों का उल्लेख था। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों बीत जाने के बाद भी PoK से जुड़े कई सवालों का समाधान नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने इसी मुद्दे को आधार बनाते हुए पाकिस्तान सरकार से जवाब और भविष्य की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
रावलाकोट में सरदार अमान खान ने जनमत संग्रह के मुद्दे को उठाया
रावलाकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित प्रदर्शन के दौरान सरदार अमान खान ने जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के अलग-अलग नेताओं ने समय-समय पर PoK की जनता से इस संबंध में वादे किए थे। आंदोलन के दौरान उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना से लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तक के नेतृत्व पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
अवामी एक्शन कमेटी पर कार्रवाई को लेकर भी विवाद
रिपोर्ट के मुताबिक, 9 जून से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन 67 दिनों से जारी है और इसमें स्थानीय नागरिकों के साथ अवामी एक्शन कमेटी भी सक्रिय है। इस संगठन के बैनर तले आंदोलन चल रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की ओर से अवामी एक्शन कमेटी को आतंकी संगठन घोषित किया गया है, जबकि प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता DG-ISPR मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी भी कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को लेकर सख्त बयान दे चुके हैं, जिससे आंदोलन और सरकार के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
ISI और पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप, आंदोलनकारियों ने खोला मोर्चा
सरदार अमान खान ने प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि PoK में हथियारों और गन कल्चर को बढ़ावा देने में पाकिस्तानी सेना तथा ISI की भूमिका रही है। खान ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की नीतियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इस रिपोर्ट में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। PoK में जारी आंदोलन अब पाकिस्तान सरकार, सेना और स्थानीय प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ते टकराव के रूप में देखा जा रहा है।