उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और AI-जनरेटेड पोस्ट वायरल होने लगीं। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर राजनीतिक संवाद के स्तर को गिराने का आरोप लगाया है। कानपुर कैंट से सपा विधायक मोहम्मद हसन रूमी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अब नेताओं के परिवारों तक पहुंच गई है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी करने वाले पुलिसकर्मी को 1.11 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की। रूमी ने कहा कि AI तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की छवि खराब करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों से निपटने के लिए साइबर कानूनों को और अधिक सख्त बनाया जाना चाहिए।
इस विवाद पर सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन नेताओं के परिवार और बच्चों को निशाना बनाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक बहस मुद्दों पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत हमलों के आधार पर। जानकारी के अनुसार, 9 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की गई थी जिसमें अदिति यादव को लेकर कथित रूप से भ्रामक, फर्जी और आपत्तिजनक दावे किए गए थे। पोस्ट में उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से मॉर्फ्ड तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है। मामले में भारत कुमार पटेल समेत तीन लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है। आजमगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री ने बताया कि जैसे ही मामला उनके संज्ञान में आया, उन्होंने तत्काल पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गांव की बेटी पूरे गांव की बेटी मानी जाती है और महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने सपा प्रमुख Akhilesh Yadav को यह सलाह भी दी कि वे अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी संयमित भाषा का इस्तेमाल करने की सीख दें। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर बढ़ते व्यक्तिगत हमलों, राजनीतिक मर्यादा और AI के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।