Supreme Court
Supreme Court: कोविड टीकाकरण से हुए लोगो के मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक स्पष्ट नीति बनाने पर जवाब मांगा है। आपको बता दे कि मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि कोविड महामारी और उसके टीकाकरण के अभियान को एक साथ एक ही दायरें में देखा जाएगा। और इतना ही नही उन्होंने ये भी सवाल उठाए की जब कोविड टीकाकरण लोगो की जान बचाने और कोविड महामारी से सुरक्षा के लिए था तो इसके साइड इफेक्ट से हुए मौतो पर भी सरकार को एक स्पष्ट नीति देनी चाहिए। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर। अधिक और सटीक जानकारी के लिए खबर को अंत तक जरूर पढ़े।
Supreme Court: जाने क्या है पूरा मामला
जानकारी के लिए बता दे कि ये पूरा मामला केरल की एक महिला सईदा केए की याचिका से जुड़ा है। आपको बता दे कि महिला का आरोप है कि उनके पति की मौत कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभाव से हुई थी। और साथ ही महिला की मांग है उन्हें इसका मुआवजा मिलना चाहिए। इसी सिलसिले में महिला ने 2023 में केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि कोविड टीकाकरण के बाद हुई मौतों की पहचान करने और परिजनों को मुआवजा देने के लिए एक नीति तैयार की जाए। हालांकि इस फैसले को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने 2023 में हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बड़ी बात
वहीं अब इस मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court ने कहा कि टीकाकरण अभियान महामारी से निपटने की रणनीति का अहम हिस्सा था, इसलिए वैक्सीन से जुड़ी मौतों को महामारी से अलग नहीं माना जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार को वैक्सीन से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों और मुआवजे की नीति पर स्पष्ट रुख पेश करना पड़ सकता है।
